Mooknaayak was a magazine started by Dr. BR Ambedkar before independence of India to give voice to the downtrodden in India. Today, this online version, is voice of downtrodden in the present India.
Buy books of DR BR Ambedkar, Buddhism, Dalit, Adiwasi & Bahujan Topics
Powered by Blomming for nikhilsablania
Thursday, November 10, 2011
Tuesday, November 8, 2011
स्पर्श लोगों के अभद्र व्यवहार के कारण और उनकी सदा ही सेवा करते रहने के कारण और निरंतर आपके साथ घृणा का आचरण करने के कारण आप में प्रतिशोध की भावना नष्ट हो गई है. आपके चारो और निराशा ही निराशा का वातावरण है. अगर आपको इस निराशापूर्ण जीवन से ऊपर उठाना है तो यह धर्मपरिवर्तन (बौद्ध धम्म के अपनाने) से ही होगा. - डॉ बी आर अम्बेडकर (३० मई १९३९ बम्बई)
भगवन बुद्ध ने राजनीति में, समाज में और धर्म में जिस महान क्रांति के आधार पर आमूल-चूल परिवर्तन किया था-उसे कालांतर में नष्ट किया गया. इसका कारण यह था कि बामनों ने राजनीती और धर्म को इकटठा कर के प्रचार किया. इस प्रचार का परिणाम यह निकला की यह (वर्णाश्रम) केवल सामाजिक प्रथा नहीं रही बल्कि राजनैतिक स्तर पर इसकी रक्षा की गई. इसी जघन्य कार्य को करने के लिए मनुस्मृति, गीता और दुसरे ग्रंथों को लिखा गया. - डॉ बी आर अम्बेडकर (२४ सितम्बर १९४४ मद्रास)
जिस तरह से बाबरी मस्जिद में ताला खुलवा कर राजीव गाँधी अल्प - संख्यक मुसलामानों के विरुद्ध खड़ा हो कर हिन्दू बहुसंख्या का चहेता बन कर अपनी सत्ता स्थापित करना चाहता था, उसी तरह राहुल गाँधी हिन्दुओं के मन में बसी ताड़का, शूर्पनखा और असुर रूपी मायावती को पछाड़ कर हिन्दू बहुसंक्यकों को खुश करके अपनी सत्ता स्थापित करना चाहता है.
Sunday, November 6, 2011
हिन्दू धर्म में बुद्धी और विचारों की प्रधानता है ही नहीं. उसमें मान-मर्याद भी नहीं है. हर हिन्दू को वेदों की गुलामी करनी ही पड़ती है. जब तक आप हिन्दू धर्म में हैं, तब तक आपको वैचारिक स्वतंत्रता नहीं मिलेगी. क्योंकि वेद, उपनिषद, ऋषि-मुनि-गीता, सभी व्यक्ति की स्वतंत्रता के विरुद्ध हैं और आपके विरुद्ध भी हैं. यह निसंदेह बात है. स्वतंत्रता के लिए धर्म परिवर्तन करें (बौद्ध धर्म अपनाए) - डॉ बी आर अम्बेडकर (३० मई १९३९ बम्बई)
Subscribe to:
Posts (Atom)
T-shirt of Dr. Ambedkar
Dr. Ambedkar's Books in Hindi
Books on Life and Work of Dr. Ambedkar in Hindi
Popular Posts
-
सावित्रीबाई फुले यांची एक फार छान कविता... तयास मानव म्हणावे का? ज्ञान नाही विद्या नाही ते घेणेची गोडी नाही बुद्धी असुनि चालत नाही तयास मानव...
-
डॉ.नरेन्द्र दाभोळकर सरांची एक निर्भीड कविता .... मुर्त्यांना पुजण्यापेक्षा, माणूसकिला पूजतो मी ! काल्पनिक देवांना न मानता, फुले,शाहू,आंबेडकर...
-
💥जात प्रतिबंध कायदा.( अॅट्रासिटी अॅक्ट)💥 SC, ST आत्याचार प्रतिबंध अधिनियम 1989. जात प्रतिबंध कायदा हे फार मोठे हत्यार SC,ST यांना दिले आहे...
-
🙏जय भिम🙏 जर रस्त्यावरील दुकानात शिवाजी आणि बाबासाहेबांचा फोटो असता तर मी त्यातून बाबासाहेबांचा फोटो उचलला असता.आपणही माझ्या मताशी सहमत अस...
-
: 🇮🇳आजचा दैनिक मी मराठी live 🇮🇳 रोहित वेमूला हत्याप्रकरण हि स्टोरी प्रत्येकाने काळजीपूर्वक वाचा,ज्यांना प्रश्नपडले होते त्या सर्व प्...
-
पुणे - भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर यांच्या 'महापरिनिर्वाण' दिनाचा उल्लेख 'पुण्यतिथी' करणार्या कालनिर्णय विरोधात न्यायालया...
-
Join the SC/ST/OBC and Buddhist Leaders, Reformers, Eminent Personalities & Political Parties' Facebook Pages - 1 Dr. ...
-
महारांच्या गळ्यात थुंकण्यासाठी मडकं आणि कमरेला झाडू कसा आला ? का असे घडले ? खरच महार समाज ईतका घाणेरडा होता.का ?" महार समाजाचा इतिहास ह...
-
कॉलेज मधे असतांना एक ठाकुर नावाची मैत्रीण कायम आपल्या जातीने राजपूत असण्यावर गर्वाने मिरवत म्हणायची "हम राजपूत है, वीरता हमारे खून मे...
-
मकर 'संक्रात' नव्हे, तर मकर 'संक्रमण'! बौद्ध लोकांनी वैज्ञानिक दृष्टीकोन जोपासावा.. सूर्य या दिवशी मकर राशीत प्रवेश होण्या...